ICSE CHAMP

ICSE Study Materials & Guidance. Work Sheets & Solutions for ICSE Students from Class 3 to 8. PDF Download. Online Solution for any Requested Service.

Slide image 1
Solutions

Solution For Every Lesson

We Provide Chapter Wise Solutions for the ICSE Students.

About Us
Slide image 2
Activities

WorkSheets and Practice Sets

We are setting worksheets and practice sets along with their solutions.

Read More
Slide image 3
Students

Class 3 to 8

We are providing solutions and study materials from class 3 to 8.

Start
Slide image 4
Downloads

Download PDF Files

You can download each and everything in the form of pdf file.

View Blog
Slide image 1
Solutions

Solution For Every Lesson

We Provide Chapter Wise Solutions for the ICSE Students.

About Us
Slide image 2
Activities

WorkSheets and Practice Sets

We are setting worksheets and practice sets along with their solutions.

Read More
Slide image 3
Students

Class 3 to 8

We are providing solutions and study materials from class 3 to 8.

Start
Slide image 4
Downloads

Download PDF Files

You can download each and everything in the form of pdf file.

View Blog

सुबोध भारती भाग 2 – सच्ची लगन | हिंदी पाठ

Image

 





सच्ची लगन


आइए, शुरू करें


यदि हमारे मन में कुछ बनने की, कुछ दिखाने की सच्ची लगन हो, तो हमें सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। आइए, इस पाठ में कुछ बच्चों से मिलते हैं और जानते हैं कि वे भविष्य में क्या बनना चाहते हैं।


उच्चारण-अभ्यास – वैज्ञानिक, प्रसंग, मुफ्त, इंजीनियर, पारुल, शिक्षिका, परिश्रम


कक्षा में अध्यापक बच्चों को महापुरुषों के जीवन के विषय में बता रहे थे। उन्होंने कई वीरों, शहीदों, वैज्ञानिकों एवं नेताओं के रोचक प्रसंग सुनाए। अंत में उन्होंने पूछा—


“बच्चो, तुम बड़े होकर क्या बनोगे?”


मनीष सबसे आगे बैठा था। वह बोला,


“गुरु जी, मैं तो डॉक्टर बनूँगा। गाँव के गरीब और बीमार लोगों का इलाज करूँगा। मेरा अपना दवाखाना होगा। मैं उसमें गरीबों का मुफ्त इलाज करूँगा।”


गुरु जी यह सुनकर बहुत खुश हुए। बोले,


“जीते रहो बेटा, तुम्हारे विचार बहुत ऊँचे हैं। तुम ज़रूर देश की सेवा करोगे।”


फिर उन्होंने सलीम से पूछा,


“तुम क्या बनोगे?”


सलीम ने कहा,


“गुरु जी, मैं तो इंजीनियर बनूँगा। मेरे पिता जी भी इंजीनियर हैं। वे कहते हैं, आजकल हमारे देश को कल-कारखानों की बड़ी ज़रूरत है। मैं नए-नए यंत्र बनाऊँगा। कारखानों में काम करूँगा। देश को समृद्ध बनाऊँगा।”


गुरु जी ने कहा,


“शाबाश सलीम, तुम ज़रूर एक होशियार इंजीनियर बनोगे। तुम्हें मन लगाकर अपनी पढ़ाई करनी चाहिए।”


फिर गुरु जी ने पारुल से पूछा,


“बेटी, तुम क्या बनोगी?”


पारुल शर्मा गई। धीरे से बोली,


“गुरु जी, मैं तो शिक्षिका बनूँगी। जो पढ़े-लिखे नहीं हैं, उन्हें पढ़ाऊँगी।”


गुरु जी ने कहा,


“आज देश को अच्छे शिक्षक-शिक्षिकाओं की बहुत ज़रूरत है। लड़कियों के लिए शिक्षिका बनना अच्छा है। वे बहुत प्रेम और धीरज से बालकों को पढ़ा सकती हैं। ज़रूर बेटी, तुम विद्या का दान देकर अच्छे नागरिक बना सकती हो।”


अंत में गुरु जी ने पूछा,


“वैभव, तुम क्या बनोगे?”


पहले तो वैभव सोच में पड़ गया कि वह क्या कहे, क्या न कहे? फिर साहस करके बोला,


“गुरु जी, मैं तो समाज-सेवक बनूँगा। लोगों की सेवा करूँगा। जनता चाहेगी तो चुनाव लड़ूँगा। और जीत गया तो मंत्री बनूँगा और देश की तन-मन से सेवा करूँगा। नहीं जीता, फिर भी जनता की सेवा तो करूँगा ही।”


गुरु जी वैभव की बात सुनकर बोले,


“तुम ज़रूर नेता बनोगे।”


फिर गुरु जी ने सारी कक्षा से कहा—


“जो लोग अपने-अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर काम करते हैं, उन्हें अवश्य सफलता मिलती है। सच्ची लगन से मेहनत करने वाले की इच्छा अवश्य पूरी होती है। याद रखो— परिश्रम ही सफलता की कुंजी है।”


शब्दार्थ

महापुरुष — महान पुरुष

रोचक — मज़ेदार

प्रसंग — किस्से

मुफ्त — बिना पैसे का

समृद्ध — अमीर

लक्ष्य — उद्देश्य

कुंजी — चाबी


अभ्यास


मौखिक


1. कक्षा में अध्यापक क्या बता रहे थे?

उत्तर— कक्षा में अध्यापक बच्चों को महापुरुषों के जीवन के बारे में बता रहे थे। वे वीरों, शहीदों, वैज्ञानिकों और नेताओं के रोचक प्रसंग सुना रहे थे।


2. अध्यापक ने पाठ के अंत में बच्चों से क्या याद रखने के लिए कहा?

उत्तर— अध्यापक ने कहा कि जो लोग अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर मेहनत करते हैं, उन्हें सफलता अवश्य मिलती है। परिश्रम ही सफलता की कुंजी है।


लिखित


प्रश्न 1. मनीष डॉक्टर बनकर क्या करना चाहता है?

उत्तर— मनीष डॉक्टर बनकर गाँव के गरीब और बीमार लोगों का इलाज करना चाहता है। वह अपना दवाखाना खोलकर गरीबों का मुफ्त इलाज करना चाहता है।


प्रश्न 2. सलीम इंजीनियर बनकर क्या बनाना चाहता है?

उत्तर— सलीम इंजीनियर बनकर नए-नए यंत्र बनाना चाहता है और देश को समृद्ध बनाना चाहता है।


प्रश्न 3. लड़कियों के लिए शिक्षिका बनना क्यों अच्छा है?

उत्तर— क्योंकि वे प्रेम और धैर्य से बच्चों को पढ़ा सकती हैं तथा उन्हें अच्छे नागरिक बना सकती हैं।


प्रश्न 4. सफलता किसे मिलती है?

उत्तर— सफलता उसी को मिलती है जो अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर सच्ची लगन और परिश्रम से काम करता है।


प्रश्न 5. आप क्या बनना चाहते हैं और क्यों बनना चाहते हैं?

उत्तर— मैं डॉक्टर बनना चाहता/चाहती हूँ क्योंकि मैं गरीब और बीमार लोगों की सेवा करना चाहता/चाहती हूँ।


भाषा की बात


1. नीचे लिखे शब्दों पर सही जगह अनुस्वार चिह्न (ं) लगाइए—

बनुगा, गाव, करुगा, बनाउगा, लडुगा

मे, बच्चो, उन्होने, वीरो, शहीदो

वैज्ञानिको, नेताओ, कारखानो, नही, मै


उत्तर— 

बनूँगा, गाँव, करूँगा, बनाऊँगा, लड़ूँगा

में, बच्चों, उन्होंने, वीरों, शहीदों

वैज्ञानिकों, नेताओं, कारखानों, नहीं, मैं


नियमानुसार इ, ई, ए, ऐ, ओ, औ की मात्राओं के साथ अनुस्वार चिह्न (ं) को अनुनासिक (ँ) के रूप में लगाते हैं। जैसे— में, नहीं, पौधों, साँप आदि।


2. पढ़िए और समझिए—


'जी' शब्द अलग लिखिए, जोड़कर नहीं—


गुरु जी

पिता जी

माता जी

नानी जी

नेता जी

अध्यापिका जी

लाला जी

दादा जी


3. बहुवचन बनाइए—

शिक्षिका — __________

पुस्तक — __________

कविता — __________

दिशा — __________


उत्तर— 

शिक्षिका — शिक्षिकाएँ

पुस्तक — पुस्तकें

कविता — कविताएँ

दिशा — दिशाएँ


4. स्त्रीलिंग शब्द चुनकर लिखिए—


शब्द बैंक:

लेखिका, नेत्री, आचार्या, अध्यापिका, डॉक्टरनी, शिक्षिका, वीरांगना, गायिका


शिक्षक — __________

नेता — __________

वीर — __________

डॉक्टर — __________

आचार्य — __________

अध्यापक — __________

गायक — __________

लेखक — __________


उत्तर— 

शिक्षक — शिक्षिका

नेता — नेत्री

वीर — वीरांगना

डॉक्टर — डॉक्टरनी

आचार्य — आचार्या

अध्यापक — अध्यापिका

गायक — गायिका

लेखक — लेखिका


5. विलोम शब्द चुनकर लिखिए—


शब्द बैंक:

असफलता, घृणा, अरुचि, कायर, अमीर, अंत, बुद्धू, धैर्यहीन


वीर × __________

रुचि × __________

प्रारंभ × __________

गरीब × __________

होशियार × __________

प्रेम × __________

धैर्यवान × __________

सफलता × __________


उत्तर— 

वीर × कायर

रुचि × अरुचि

प्रारंभ × अंत

गरीब × अमीर

होशियार × बुद्धू

प्रेम × घृणा

धैर्यवान × धैर्यहीन

सफलता × असफलता


6. नए शब्द बनाइए—


दवा → दवाखाना


कार → __________


जेल → __________


पागल → __________


यहाँ ‘खाना’ का अर्थ है ‘घर’।


उत्तर— 

दवा + खाना = दवाखाना

कार + खाना = कारखाना

जेल + खाना = जेलखाना

पागल + खाना = पागलखाना


7. अर्थ लिखिए—


विद्या दान — विद्या का दान


वस्त्र दान — ______________________


संपत्ति दान — ______________________


दूसरों की भलाई के लिए अपनी अच्छी वस्तुएँ दान में दे दी जाती हैं।


उत्तर— 

विद्या दान — विद्या का दान

वस्त्र दान — वस्त्रों का दान

संपत्ति दान — संपत्ति का दान


8. उदाहरण देखकर लिखिए—

बनना बनूँगा बनूँगी

पढ़ना __________ __________

करना __________ __________

सकना __________ __________

कहना __________ __________


उत्तर— 

बनना बनूँगा बनूँगी

पढ़ना → पढ़ूँगा → पढ़ूँगी

करना → करूँगा → करूँगी

सकना → सकूँगा → सकूँगी

कहना → कहूँगा → कहूँगी


रचनात्मक गतिविधियाँ


1. नीचे दिए चित्र पहचानकर बताइए कि ये कौन हैं?




उत्तर— 

डॉक्टर

शिक्षक

इंजीनियर

नेता

नर्स

पुलिसकर्मी

खिलाड़ी (क्रिकेट खिलाड़ी)

किसान

डाकिया



2. कौन क्या-क्या करता है, लिखिए—


शब्द:

भाषण देना, पढ़ाना, दवा देना, यंत्र बनाना, इंजेक्शन लगाना, चुनाव लड़ना, मशीन चलाना, अच्छी बातें सिखाना


उत्तर— 

डॉक्टर → दवा देना, इंजेक्शन लगाना

इंजीनियर → यंत्र बनाना, मशीन चलाना

शिक्षक → पढ़ाना, अच्छी बातें सिखाना

नेता → भाषण देना, चुनाव लड़ना


3. रचनात्मक गतिविधि


रविवार को आने वाले हिंदी अखबार से कोई बाल कविता काटकर चिपकाइए और उसे जोर-जोर से पढ़िए।


उत्तर— 




Download PDF File



सुबोध भारती भाग 2 – सयानी चिड़िया | प्रश्न उत्तर, सारांश और अभ्यास प्रश्न

Image

 





सयानी चिड़िया


आइए, शुरू करें


इधर-उधर उड़ती चिड़ियाँ हम सबका ध्यान अपनी ओर खींच लेती हैं। ये नन्हे पंख, नन्ही चोंच, नन्हे पैरों से अपनी ज़रूरत के सारे काम कर लेती हैं। चिड़ियों की यह सुंदर कहानी पढ़ें कविता में....


उच्चारण-अभ्यास – चिड़िया, खिड़की, दस्तक, नीड़, पंख, मेहँदी, तड़पाती


कविता


पहले गाना गाती चिड़िया

पीछे दाना खाती चिड़िया।


खिड़की-खिड़की दस्तक देकर

घर के भीतर आती चिड़िया,

कोमल-कोमल तिनके चुनकर

अपना नीड़ बनाती चिड़िया।


कभी धूल में, कभी ताल में

धो-धो पंख नहाती चिड़िया,

काजल-मेहँदी-कंगन लेकर

सोलह रूप सजाती चिड़िया।


और सयानी बिटिया जैसी—

देश छोड़ उड़ जाती चिड़िया,

भूली-बिसरी यादें बनकर—

बहुत-बहुत तड़पाती चिड़िया।


शब्दार्थ

दस्तक देना – खटखटाना

नीड़ – घोंसला

ताल – तालाब

सयानी – बुद्धिमान


कविता का सारांश (हिंदी)


'सयानी चिड़िया' कविता में कवि ने चिड़िया के सुंदर और मनमोहक जीवन का चित्रण किया है। चिड़िया पहले मधुर गीत गाती है और फिर अपना भोजन खोजकर खाती है। वह खिड़कियों पर दस्तक देकर घरों के पास आती है तथा कोमल तिनकों को चुनकर अपना घोंसला बनाती है। कभी धूल में और कभी तालाब के पानी में अपने पंख साफ़ करके नहाती है। कवि उसकी सुंदरता की तुलना ऐसे करता है मानो उसने काजल, मेहँदी और कंगन पहनकर स्वयं को सजा लिया हो। अंत में चिड़िया की तुलना एक सयानी बेटी से की गई है, जो बड़ी होकर अपना घर छोड़ देती है। उसके जाने के बाद उसकी यादें लोगों के मन में रह जाती हैं और वे उसे बहुत याद करते हैं। यह कविता चिड़िया की सुंदरता, मेहनत, स्वावलंबन और बिछड़ने की भावना को सरल एवं भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करती है।


मौखिक


1. चिड़िया दाना खाने से पहले क्या काम करती है?

उत्तर: चिड़िया दाना खाने से पहले गाना गाती है।


2. चिड़िया धूल से पंखों को क्यों धोती है?

उत्तर: अपने पंखों को साफ़ और सुंदर बनाने के लिए।


3. ‘चिड़िया बहुत तड़पाती है’—किसे और क्यों तड़पाती है?

उत्तर: चिड़िया अपने बिछड़ने के बाद लोगों को अपनी यादों से तड़पाती है।


लिखित


प्रश्न 1. चिड़िया घर के भीतर कैसे आती है?


उत्तर: चिड़िया खिड़की-खिड़की दस्तक देकर घर के भीतर आती है।


प्रश्न 2. चिड़िया अपने घोंसले को किससे बनाती है?


उत्तर: चिड़िया कोमल-कोमल तिनकों से अपना घोंसला बनाती है।


प्रश्न 3. चिड़िया अपने आपको कैसे सजाती है?


उत्तर: चिड़िया काजल, मेहँदी और कंगन लेकर अपने आपको सजाती है।


प्रश्न 4. चिड़िया को बिटिया जैसी क्यों कहा गया है?


उत्तर: क्योंकि सयानी बिटिया की तरह वह भी एक दिन अपना घर छोड़कर उड़ जाती है।


प्रश्न 5. कविता की पंक्तियाँ पूरी कीजिए—


कभी धूल में, कभी ताल में

धो-धो पंख नहाती चिड़िया।

काजल-मेहँदी-कंगन लेकर

सोलह रूप सजाती चिड़िया।


और सयानी बिटिया जैसी—

देश छोड़ उड़ जाती चिड़िया,

भूली-बिसरी यादें बनकर—

बहुत बहुत तड़पाती चिड़िया।


भाषा की बात


1. विलोम शब्द लिखिए—


पहले × बाद में

कोमल × कठोर

अपना × पराया

छोड़ना × पकड़ना

उड़ना × बैठना

बनाना × बिगाड़ना


2. 'ड़' वर्ण वाले शब्द कविता में से चुनकर लिखिए—


चिड़िया

खिड़की

दस्तक

नीड़

तड़पाती

उड़


3. उदाहरण देखकर रेखा द्वारा मिलान कीजिए और लिखिए—


कोमल — तिनके

सयानी — बिटिया

भूली-बिसरी — यादें

अपना — नीड़

सोलह — रूप

उत्तर


तिनके कैसे हैं?

कोमल।


बिटिया कैसी है?

सयानी।


यादें कैसी हैं?

भूली-बिसरी।


नीड़ किसका है?

अपना।


रूप कितने हैं?

सोलह।


4. अलग-अलग रंगों की रेखा खींचकर पक्षियों का उनकी बोली से मिलान कीजिए—


पक्षी


कबूतर

तोता

कौआ

कोयल

चिड़िया


बोली


टें... टें... टें...

काँव-काँव

गुटर गूँ

चीं-चीं

कुहू-कुहू


उत्तर:

कबूतर — गुटर गूँ

तोता — टें...टें...टें...

कौआ — काँव-काँव

कोयल — कुहू-कुहू

चिड़िया — चीं-चीं


रचनात्मक गतिविधि


इस पेड़ पर बहुत से नभचर रहते हैं। उनके चित्रों को पेंसिल से पूरा करके रंग भरिए—




Download PDF File



सुबोध भारती भाग 2 – रबड़ की कहानी | प्रश्न उत्तर, सारांश और अभ्यास प्रश्न

Image

 





रबड़ की कहानी


आइए, शुरू करें


बहुत काम की चीज़ है रबड़। सोचिए, यदि आपके पेंसिल बॉक्स में रबड़ न हो तो? साइकिल में टायर-ट्यूब न हों तो? बरसात में पहनने के लिए बरसाती जूते न हों तो? आइए पढ़ें, यह पाठ हमें रबड़ की कौन-सी कहानी सुना रहा है...


उच्चारण-अभ्यास:

चिड़ियाँ, कलियाँ, खुशबू, सिरजनहार, बूँदें, हरियाली


बरसात के दिन थे। चमड़े के जूते पानी में खराब न हो जाएँ, इसलिए पिता जी ने कमल के लिए रबड़ के जूते खरीदे। एक बरसाती भी ले आए, जो रबड़ की बनी हुई थी। पेंसिल का लिखा मिटाने के लिए एक रबड़ और खेलने की एक गेंद भी खरीद लाए। रबड़ की इतनी सारी वस्तुएँ पाकर कमल के आनंद का पार न रहा। वह गुब्बारे-सा फूल उठा।


वह दौड़ता हुआ अपनी माँ के पास गया और बोला,

“देखो माँ, पिता जी रबड़ की कितनी सारी चीजें लाए हैं। माँ! क्या रबड़ का पेड़ होता है, जिस पर ये सब चीजें लगती हैं?”


पिता जी हँसते हुए कमरे में आए और बोले,

“हाँ बेटा, रबड़ का पेड़ होता है। परंतु ये सब वस्तुएँ उस पेड़ पर नहीं लगतीं, ये तो कारखानों में बनती हैं। रबड़ के पेड़ से एक प्रकार का दूध निकलता है।”


“रबड़ के पेड़ से दूध!” कमल चौंककर बोला।


“हाँ! पहले पेड़ के तने में कई छेद किए जाते हैं और उनके नीचे टीन की बाल्टियाँ-बर्तन लटका दिए जाते हैं। दिनभर में एक पेड़ से लगभग दो-तीन किलो दूध निकलता है। फिर सब दूध इकट्ठा करते हैं और पानी में डालकर उबालते हैं। इससे रबड़ बर्तन में नीचे बैठ जाता है। उसे मशीनों द्वारा सुखा लेते हैं और कारखानों में उससे इच्छा के अनुसार चीजें बनाते हैं।” माँ ने कमल की बात का उत्तर देते हुए बताया।


पिता जी ने कहा,

“रबड़ से कई वस्तुएँ बनती हैं। साइकिलों और मोटर गाड़ियों के टायर-ट्यूब, जूते, बरसातियाँ, नलियाँ, बिजली के तारों के खोल, खिलौने, गेंद, गुब्बारे आदि सब वस्तुएँ रबड़ से बनती हैं।”


कमल ने पूछा,

“पिता जी, ये सब वस्तुएँ रबड़ से क्यों बनती हैं?”


पिता जी ने कहा,

“बेटा, रबड़ बहुत उपयोगी पदार्थ है। इसके कई गुण हैं। यह लचीला, हलका और सिकुड़ने-फैलने वाला पदार्थ है। इस पर पानी का असर नहीं होता। इसमें से हवा भी नहीं निकलती। इससे बिजली के झटके नहीं लगते। आजकल जहाँ देखो, वहाँ रबड़ की वस्तुएँ दिखाई देती हैं। रबड़ की माँग को पूरा करने के लिए अब तो नकली रबड़ भी बनाया जाता है।”


कमल को अब पता लग गया कि रबड़ के पेड़ से रबड़ की वस्तुएँ कैसे बनती हैं।


शब्दार्थ

गुब्बारे-सा फूल उठा – बहुत प्रसन्न होना।

उपयोगी – उपयोग में आने वाला।

पदार्थ – वस्तु।


अभ्यास के उत्तर


मौखिक


1. पिता जी ने कमल के लिए कौन-कौन-सी वस्तुएँ खरीदीं?

उत्तर: पिता जी ने कमल के लिए रबड़ के जूते, रबड़ की बरसाती, रबड़ (इरेज़र) और एक गेंद खरीदी।


2. रबड़ के पेड़ के दूध से रबड़ कैसे बनाया जाता है?

उत्तर: पेड़ के तने में छेद करके उसका दूध निकाला जाता है। उसे इकट्ठा करके पानी में डालकर उबाला जाता है। फिर उसे सुखाकर कारखानों में रबड़ बनाया जाता है।


3. तुम्हारे पास रबड़ की कौन-कौन-सी चीजें हैं?

उत्तर: मेरे पास रबड़, जूते, गेंद और चप्पल हैं।


लिखित


प्रश्न 1. कमल के पिता ने उसके लिए रबड़ के जूते क्यों खरीदे?


उत्तर: कमल के पिता ने उसके लिए रबड़ के जूते खरीदे क्योंकि चमड़े के जूते पानी में खराब हो जाते हैं।


प्रश्न 2. रबड़ से कौन-कौन-सी वस्तुएँ बनती हैं?


उत्तर: रबड़ से टायर-ट्यूब, जूते, बरसातियाँ, नलियाँ, बिजली के तारों के खोल, खिलौने, गेंद और गुब्बारे आदि वस्तुएँ बनती हैं।


प्रश्न 3. रबड़ जैसे उपयोगी पदार्थ के गुण लिखिए।


उत्तर: रबड़ लचीला, हलका तथा सिकुड़ने-फैलने वाला पदार्थ है। इस पर पानी का असर नहीं होता, इसमें से हवा नहीं निकलती और इससे बिजली के झटके नहीं लगते।


प्रश्न 4. नकली रबड़ क्यों बनाया जाता है?


उत्तर: रबड़ की बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए नकली रबड़ बनाया जाता है।


प्रश्न 5. बरसात में रबड़ के जूते क्यों पहने जाते हैं?


उत्तर: बरसात में रबड़ के जूते पहने जाते हैं क्योंकि उन पर पानी का असर नहीं होता और वे खराब नहीं होते।


प्रश्न 6. किसने कहा? किससे कहा?


कथन किसने? किससे?

(क) "क्या रबड़ का पेड़ होता है?" कमल माँ से

(ख) "हाँ बेटा! रबड़ का पेड़ होता है।" पिता जी कमल से

(ग) "अब नकली रबड़ भी बनाया जाता है।" पिता जी कमल से


प्रश्न 7. उपयुक्त शब्द चुनकर खाली स्थान भरिए।

(उपयोगी दूध कारखानों)


क. रबड़ की वस्तुएँ कारखानों में बनाई जाती हैं।

ख. रबड़ बनाने के लिए रबड़ के दूध को पानी में डालकर उबाला जाता है।

ग. रबड़ एक उपयोगी पदार्थ है।


भाषा की बात


1. ज़ोर से पढ़िए और उच्चारण करके अंतर जानिए—


ड़ – चमड़ा, रबड़, पेड़, बड़ा, सड़क, कड़क, कपड़ा

ड – डलिया, निडर, ठंडा, डगर, डमरू, डुगडुगी, डाली


2. नीचे लिखे शब्दों में सही स्थान पर ड/ड़ लिखकर शब्द पूरे कीजिए—


लड़का

कड़क

डर

घोड़ा

डंडी

झगड़ा

डंका

भेड़िया

डगर

डिब्बा


3. शब्दों का सही उच्चारण करते हुए लिखिए—


ट्ठ – इकट्ठा  लट्ठा

ट्यू – ट्यूब  ट्यून


च्छ – इच्छा  मच्छर

स्त – वस्तु  नमस्ते


4. वचन बदलिए—


जूता — जूते

गुब्बारा — गुब्बारे

खिलौना — खिलौने

गेंद — गेंदें

चीज़ — चीज़ें


मशीन — मशीनें

तार — तार

बरसात — बरसातें

नली — नलियाँ

बाल्टी — बाल्टियाँ


5. नीचे लिखे शब्दों को ज़ोर से पढ़िए और सही रूप में लिखिए—


करम — कर्म

प्रार्थना — प्रार्थना

पूरब — पूर्व

चरचा — चर्चा

बरषा — वर्षा

मूरख — मूर्ख


6. रबड़ कैसा पदार्थ है? उसके गुण पाठ में से चुनकर लिखिए।


उत्तर:

रबड़ एक उपयोगी पदार्थ है। यह लचीला, हलका और सिकुड़ने-फैलने वाला होता है। इस पर पानी का असर नहीं होता। इसमें से हवा नहीं निकलती और इससे बिजली के झटके नहीं लगते।


7. उदाहरण पढ़िए, समझिए और क्रिया बदलिए—

भूतकाल → वर्तमान काल → भविष्य काल

बरसात के दिन थे → बरसात के दिन हैं → बरसात के दिन होंगे।

पिता जी ने गेंद खरीदी। → पिता जी गेंद खरीदते हैं। → पिता जी गेंद खरीदेंगे।

पेड़ से दूध निकला। → पेड़ से दूध निकलता है। → पेड़ से दूध निकलेगा।

रबड़ का एक पेड़ था। → रबड़ का एक पेड़ है। → रबड़ का एक पेड़ होगा।


रचनात्मक गतिविधि

1. यहाँ कुछ वस्तुओं के चित्र दिए गए हैं। रबड़ की बनी वस्तुओं के चारों ओर हरा रंग भरिए—


चित्र:





रबड़ (इरेज़र) ✔️

टायर ✔️

छाता ✖️

जूते ✖️


2. इस चित्र को पूरा कीजिए और दिए गए रंगों के नंबरों के अनुसार रंग भरिए—





रंगों के नंबर:


1. लाल

2. हरा

3. नीला

4. पीला

5. काला


Download PDF File



सुबोध भारती भाग 2 – आम का पेड़ | प्रश्न उत्तर, सारांश और अभ्यास प्रश्न

Image

 





आम का पेड़


आइए, शुरू करें


हम अपने माता-पिता से हर समय कुछ न कुछ माँगते रहते हैं। न मिलने पर बहुत शिकायत करते हैं और मिल जाने पर भी अधिक देर खुश नहीं रहते, फिर बेचैन हो जाते हैं। ऐसा ही था आम का पेड़। फलों से लदे होने पर भी वह प्रसन्न नहीं था। हवा ने उससे ऐसा क्या कहा, जिससे पेड़ खुशी से झूमने लगा? आइए, पढ़ें...


उच्चारण-अभ्यास


अमियाँ, मुसकराई, चौंकते, टहनियाँ, ईर्द-गिर्द, धन्यवाद


एक गाँव में विशालकाय आम का पेड़ था। उस पेड़ पर बहुत ही रसीले आम लगते थे लेकिन बच्चे थे कि आम को पकने से पहले ही तोड़कर खा लेते थे। बेचारा पेड़ मन मसोसकर रह जाता। बच्चे आए दिन पेड़ की शाखाओं पर चढ़ते और कच्ची अमियाँ खाने के चक्कर में कई कमजोर डालियाँ तोड़ डालते।


आम का पेड़ सोचता कि वे पेड़ अच्छे हैं, जिन पर कोई फल नहीं लगते। कम से कम वे चैन से तो रहते हैं।


एक दिन की बात है। आम का पेड़ उदास था। हवा ने उससे पूछा, “क्यों भाई! क्या बात है? लगता है, काफ़ी परेशान हो।”


पेड़ बोला, “हवा बहना! क्या बताऊँ? काश! मैं भी तुम्हारी तरह चल-फिर सकता। यहाँ खड़े-खड़े तो मैं तंग आ गया हूँ। अच्छा होता, मैं दूर किसी घने जंगल में उगा होता!”


हवा ने सुना, तो हैरान हो गई मगर चुप रही। पेड़ ने कहा, “आबादी के पास हम फलदार वृक्षों का खड़ा रहना ही बेकार है। मुझे देखो! मैंने अब तक अपनी काया में पके हुए फल तक नहीं देखे। ये इंसानों के बच्चे फलों के पकने का भी इंतज़ार नहीं करते। देखो न, गाँव के बच्चों ने मुझ पर चढ़-चढ़कर मेरे अंगों का क्या हाल बना दिया है। कई टहनियों और पत्तों को तोड़ डाला है।”


हवा मुसकराई। फिर पेड़ से बोली, “पेड़ भाई! दूर के ढोल सुहावने होते हैं। जंगल में फलदार वृक्ष तो बहुत दुखी हैं। मुझे तो उनकी हालत पर तरस आता है।”


“जंगल में फलदार वृक्ष बहुत दुखी हैं! हवा बहना! तुम मज़ाक तो नहीं कर रहीं?” पेड़ ने चौंकते हुए पूछा।


“और नहीं तो क्या? जंगल के फलदार पेड़ अपने ही शरीर के फलों से परेशान रहते हैं। पेड़ों में फल बड़ी संख्या में लगते हैं। वहाँ फलों को खाने वाला तो दूर, तोड़ने वाला भी नहीं होता। पक्षी कितने फल खा पाते हैं? फल पेड़ पर ही पकते हैं। पेड़ बेचारे अपने ही फलों का वजन नहीं सँभाल पाते। फलों का बोझ सहते-सहते पेड़ का सारा बदन दुखता रहता है। जब फल पककर गिर जाते हैं, तभी जंगल के पेड़ों को राहत मिलती है। यही नहीं, ढेर सारे पके हुए फल पेड़ के ईर्द-गिर्द गिरकर सड़ते हैं। पेड़ बेचारे अपने ही फलों की सड़ाँध में चुपचाप खड़े रहते हैं।” हवा ने बताया।


“अच्छा बहना! मैं ऐसे ही ठीक हूँ। मेरे फल इतने मीठे हैं, तभी तो बच्चे उनके पकने का इंतज़ार नहीं करते। अरे हाँ, याद आया... पतझड़ के मौसम में ये बच्चे तो मेरे पास फटकते भी नहीं हैं। उन दिनों मैं परेशान हो जाता हूँ। यही बात मेरी टहनियों और पत्तों की, वसंत आते ही मेरे कोमल अंग उग आते हैं।” आम के पेड़ ने हवा से कहा।


हवा मुसकराते हुए आगे बढ़ गई। पेड़ ने मन ही मन हवा का धन्यवाद दिया और खुशी से झूमने लगा।


अभ्यास


मौखिक


1. पेड़ मन मसोसकर क्यों रह जाता था?

उत्तर: क्योंकि बच्चे आम के पकने से पहले ही उन्हें तोड़कर खा लेते थे और उसकी डालियाँ भी तोड़ देते थे।


2. अंत में पेड़ खुशी से क्यों झूमने लगा?

उत्तर: क्योंकि हवा की बातों से उसे समझ आ गया कि उसकी स्थिति जंगल के फलदार पेड़ों से बेहतर है। इसलिए उसने हवा का धन्यवाद दिया और खुशी से झूमने लगा।


लिखित


प्रश्न 1. पेड़ की कमजोर डालियाँ कैसे टूट जाती थीं?


उत्तर: बच्चे कच्ची अमियाँ खाने के लिए पेड़ पर चढ़ते थे और इसी कारण उसकी कमजोर डालियाँ टूट जाती थीं।


प्रश्न 2. पेड़ घने जंगल में क्यों उगना चाहता था?


उत्तर: क्योंकि वह बच्चों द्वारा फल तोड़ने और डालियाँ तोड़े जाने से परेशान था। उसे लगता था कि जंगल में वह चैन से रहेगा।


प्रश्न 3. जंगल के फलदार वृक्षों का बदन क्यों दुखता रहता था?


उत्तर: क्योंकि उनके फलों का वजन बहुत अधिक होता था। फलों का बोझ सहते-सहते उनका बदन दुखता रहता था।


प्रश्न 4. आम के पेड़ ने क्यों कहा, “अच्छा बहना, मैं ऐसे ही ठीक हूँ।”


उत्तर: क्योंकि हवा ने उसे बताया कि जंगल के फलदार पेड़ों की परेशानी उससे भी अधिक है। यह जानकर वह अपनी स्थिति से संतुष्ट हो गया।


5. कहानी पढ़कर वाक्यों को क्रम से लगाइए—


क. “अच्छा बहना! मैं ऐसे ही ठीक हूँ।”

ख. “अच्छा होता, मैं दूर किसी घने जंगल में उगा होता!”

ग. उस पेड़ पर बहुत ही रसीले आम लगते थे।

घ. “क्यों भाई! क्या बात है?”

ङ. “पेड़ भाई! दूर के ढोल सुहावने होते हैं।”


उत्तर (क्रम संख्या सहित):

क. 5 — “अच्छा बहना! मैं ऐसे ही ठीक हूँ।”

ख. 3 — “अच्छा होता, मैं दूर किसी घने जंगल में उगा होता!”

ग. 1 — उस पेड़ पर बहुत ही रसीले आम लगते थे।

घ. 2 — “क्यों भाई! क्या बात है?”

ङ. 4 — “पेड़ भाई! दूर के ढोल सुहावने होते हैं।”


भाषा की बात


1. ड़/ढ़ में अंतर समझिए। शब्दों को ज़ोर-ज़ोर से पढ़िए—


ड़ – पेड़, बड़ा, तोड़, सड़क, सड़ाँध, पतझड़

ढ़ – चढ़तें, चढ़, सीढ़ी, गढ़, पढ़ाई, कढ़ाई


2. शब्द बनाइए


फल → फलदार

फूल → फूलदार

शान → शानदार

जायका → जायकेदार

विशाल + काय → विशालकाय

भीम + काय → भीमकाय


3. वचन बदलिए


बच्चा → बच्चे

पत्ता → पत्ते

टहनी → टहनियाँ

शाखा → शाखाएँ


4. शब्द पढ़िए, समझिए और लिखिए


रसीला → रसीली → रसीले

बेचारा → बेचारी → बेचारे

कच्चा → कच्ची → कच्चे

चना → चनी → चने


रसीला – पुल्लिंग, एकवचन

रसीले – पुल्लिंग, बहुवचन

रसीली – स्त्रीलिंग, एकवचन/बहुवचन


5. ज़ोर से पढ़िए, समझिए और लिखिए—


• खा पाते हैं – मुख्य क्रिया है – खाना


इसी प्रकार मुख्य कार्य लिखिए—


पकते रहते हैं – पकना

टूट जाती है – टूटना

दुखता रहता है – दुखना

सड़ते रहते हैं – सड़ना

ढो जाता है – ढोना

उग आते हैं – उगना


रचनात्मक गतिविधि


• चार–पाँच छोटे–बड़े आम बनाइए और उनमें रंग भरिए। आम का असली पत्ता भी चिपकाइए।





Download PDF File